swetamber purane ya digamer
श्वेतांबर (Shwetambar) और दिगंबर (Digambar) दोनों ही जैन धर्म के प्रमुख संप्रदाय हैं। दोनों की उत्पत्ति महावीर स्वामी के निर्वाण (ईसा पूर्व 527) के कुछ समय बाद हुई थी, जब मतभेदों के कारण जैन समाज दो भागों में विभाजित हो गया।
इतिहास के अनुसार, दिगंबर संप्रदाय को प्राचीन (पुराना) माना जाता है, क्योंकि इसमें कई परंपराएँ और आचार प्रमुखता से पुराने ग्रंथों पर आधारित हैं। दिगंबर परंपरा के अनुसार, उनके मूलाचार और साधु-जीवन, महावीर स्वामी के समय से ही चले आ रहे हैं।
श्वेतांबर संप्रदाय भी प्राचीन है, लेकिन दिगंबरों के अनुसार, श्वेतांबर परंपरा में कुछ परिवर्तन बाद में आए हैं। श्वेतांबर ग्रंथों के अनुसार, उनका संप्रदाय भी महावीर स्वामी के समय से चला आ रहा है, परंतु ऐतिहासिक दृष्टि से दोनों संप्रदाय लगभग एक ही समय (ईसा पूर्व 3-4 शताब्दी) में अलग-अलग हुए।
संक्षेप में: – दोनों ही प्राचीन हैं, परंतु दिगंबर संप्रदाय को अक्सर 'पुराना' माना जाता है। – जैन धर्म के दोनों संप्रदायों की अपनी-अपनी परंपरा और मान्यताएँ हैं।
यदि आप किसी विशेष संदर्भ में 'पुराना' पूछ रहे हैं, तो कृपया स्पष्ट करें।