yani swetamber sampraday digamber ke bad me aaye
हाँ, श्वेतांबर संप्रदाय दिगंबर संप्रदाय के बाद अस्तित्व में आया। जैन धर्म का मूल विभाजन दो प्रमुख संप्रदायों में हुआ—दिगंबर (दिगम्बर) और श्वेतांबर। ऐतिहासिक दृष्टि से माना जाता है कि महावीर स्वामी के निर्वाण (ईसा पूर्व 527) के लगभग 200-300 वर्ष बाद जैन संघ में मतभेद के कारण ये दो प्रमुख संप्रदाय बने।
दिगंबर संप्रदाय प्राचीन और कठोर तपस्या का पालन करता है तथा इनके साधु पूर्णतः नग्न रहते हैं। श्वेतांबर संप्रदाय बाद में विकसित हुआ, जिसमें साधु-साध्वियाँ सफेद वस्त्र पहनते हैं और कुछ नियमों में लचीलापन है। श्वेतांबर संप्रदाय का उद्भव मुख्यतः पश्चिम भारत (गुजरात, राजस्थान) में हुआ।
इस प्रकार, ऐतिहासिक रूप से श्वेतांबर संप्रदाय दिगंबर के बाद अस्तित्व में आया।