Arihant pad per kitne devo ka vaas hai
जैन दर्शन के अनुसार, "अरिहंत पद" (अरिहंत स्थिति) में अनंत (असंख्य) देवों का वास होता है। यह मान्यता है कि जब कोई जीव अरिहंत बनता है, यानी सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, और सम्यक्चरित्र के साथ चार कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) का क्षय कर लेता है, तब वह अरिहंत कहलाता है। उस समय उसके चारों ओर अनंत देवगण उसकी पूजा और वंदना के लिए उपस्थित होते हैं।
इस विषय में जैन आगमों में उल्लेख मिलता है कि अरिहंत का महिमा मंडन करने के लिए "चौदह लोकों" के अनंत देवगण उपस्थित होते हैं। विशेष रूप से, "कल्पसूत्र" और "तत्त्वार्थ सूत्र" के अनुसार, अरिहंत की उपस्थिति में अनंत देवगणों का समवसरण मंडप सजता है और वे अरिहंत की वंदना करते हैं।
संक्षिप्त उत्तर: अरिहंत पद पर अनंत (असंख्य) देवों का वास और पूजन होता है।