jiv daya se gandhar pad paya
आपका प्रश्न "जीव दया से गांधार पद पाया" जैन धर्म की शिक्षाओं में जीव दया (प्राणियों पर करुणा) के महत्व को दर्शाता है। जैन परंपरा में, जीव दया को अत्यंत महत्वपूर्ण तप और गुण माना गया है। यह कहा जाता है कि केवल अहिंसा और दया के मार्ग पर चलकर ही आत्मा को उन्नत स्थिति (उच्च पद) प्राप्त हो सकता है।
गांधार पद का अर्थ है भगवान महावीर के मुख्य शिष्य—गांधार, जो गणधर कहलाते हैं। गणधर वे होते हैं जिन्होंने पूर्णतः अहिंसा, सत्य, और दया के मार्ग को अपनाया और अपने तप, ज्ञान और दया के कारण भगवान महावीर के प्रथम शिष्य (गणधर) बने।
इसलिए, जैन धर्म में यह कहा जाता है कि "जीव दया से ही गणधर पद की प्राप्ति होती है"— अर्थात्, जो व्यक्ति सभी जीवों पर दया करता है, अहिंसा का पालन करता है, वही आत्मा उच्चतम पद (जैसे गणधर पद) प्राप्त कर सकती है।
सारांश: जैन धर्म के अनुसार, जीव दया (अहिंसा) के बिना आत्मा की उन्नति संभव नहीं है और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही परम पद की प्राप्ति (जैसे गणधर पद) संभव है।