5 आरा में किनको केवलज्ञान हुआ
संक्षेप उत्तर: पंचम आरा (दुषमा काल) में भारतक्षेत्र में किसी को भी नया केवलज्ञान नहीं होता।
थोड़ा विस्तार:
- आगमिक परम्परा में केवलज्ञान की सिद्धि भारतक्षेत्र में 3री और 4थी आरा तक मानी गई है; 5वीं आरा में धर्म-बल घटने से नवीन केवली नहीं होते।
- महावीर प्रभु के बाद “अनुबद्ध केवली” के रूप में गौतमस्वामी, सुधर्मास्वामी और अन्त में जम्बूस्वामी आते हैं; जम्बूस्वामी को वर्तमान काल-चक्र के अन्तिम केवली माना गया है। उनके बाद 5वीं आरा में किसी को केवलज्ञान नहीं हुआ और न होगा।
- परम्परानुसार मतभेद: श्वेताम्बर परम्परा में जम्बूस्वामी का केवलज्ञान-काल पंचम में भी बताया जाता है; दिगंबर परम्परा का सरांश यह कि पंचम काल में नए केवली नहीं होते। दोनों ही मान्यताओं में निष्कर्ष समान है—जम्बूस्वामी के बाद कोई केवली नहीं।