आचार्य की आसातना किसने की
“आसातना” का अर्थ है साधु/आचार्य को कष्ट, अपमान या उत्पीड़न करना। परंपरागत जैन इतिहास में सबसे प्रसिद्ध उदाहरण आचार्य कलकाचार्य के प्रसंग का है, जिसमें उज्जैन के राजा गार्दभिल्ल ने संघ पर अत्याचार किया—इसे आचार्य की “आसातना” कहा गया।
यदि आपका संकेत किसी अन्य आचार्य के विशेष प्रसंग की ओर है, तो सही उत्तर उसी प्रसंग के अनुसार होगा; कृपया संबंधित आचार्य का नाम/घटना स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक होता है।