Rajoharan लिये बिना मोक्ष का राज किसने पाया
किसी ने नहीं।
स्पष्टीकरण:
- “राजोहारण” (श्वेतांबर परंपरा का ऊनी झाड़ू) या “पिच्छी” (दिगंबर परंपरा) साधु‑धर्म के प्रतीक हैं। मोक्ष पाने के लिए पूर्ण त्याग, दीक्षा और साधु-व्रत अनिवार्य माने गए हैं। इसलिए राजोहारण/पिच्छी लिए बिना (अर्थात दीक्षा लिए बिना) मोक्ष का “राज/द्वार” किसी ने प्राप्त नहीं किया।
- दोनों परंपराओं की मान्यता एक ही है: मोक्ष अंतिम जन्म में केवल संयमित साधु‑अवस्था से ही संभव है; गृहस्थावस्था से नहीं।
और पढ़ें: