सयम कितने प्रकार के होते है
जैन दर्शन में “संयम” तीन प्रकार का माना गया है:
- देशविरति संयम — गृहस्थ का आंशिक संयम; अणुव्रत, गुणव्रत और शिक्षा-व्रत के पालन से होता है.
- सर्वविरति संयम — साधु/साध्वी का पूर्ण संयम; पाँच महाव्रतों आदि का अखण्ड पालन.
- यथाख्यात (वितराग) चरित्र — राग-द्वेष से सर्वथा रहित परम संयम; सम्यक् चरित्र की सिद्ध अवस्था.
टिप्पणी:
- यह त्रिविध संयम का वर्णन तत्त्वार्थसूत्र आदि में स्वीकृत है।
- दिगम्बर और श्वेताम्बर—दोनों परम्पराओं में मूलतः यही तीन भेद माने जाते हैं; केवल व्याख्या के शब्दों में थोड़ा भिन्न प्रयोग मिलता है।