12 भिक्षु प्रतिमा मैं नियमा किसका उपद्रव्य आता है
आपका वाक्य थोड़ा अस्पष्ट है, फिर भी संक्षेप में स्पष्ट कर रहा हूँ:
- 12वीं प्रतिमा “भिक्षु प्रतिमा” कहलाती है। इसमें श्रावक “नियम” लेकर मुनि-जैसा आचार अपनाता है—अर्थात् जितना सम्भव हो, पंचमहाव्रत, तीन गुpti, पाँच समितियाँ, क्षुल्लक/ऐलक जैसी सरल जीवन-रिति (डिगम्बर परम्परा) या दीक्षा-पूर्व कठोर ब्रह्मचर्य, अल्पोपभोग, अनर्थ-दण्ड से पूर्ण विरक्ति (श्वेताम्बर परम्परा) का निष्ठापूर्वक पालन करता है।
- यहाँ “नियम” का अर्थ है—दीक्षा-पूर्व जीवनभर मुनि-धर्म के निकटतम आचरण का दृढ़ संकल्प। इसका सम्बन्ध साधना और आचार से है, न कि किसी “उपद्रव्य” (ऐसी कोई तकनीकी श्रेणी प्रतिमाओं में प्रचलित नहीं) से।
- डिगम्बर/श्वेताम्बर भेद:
यदि आपके “उपद्रव्य” शब्द से आशय किसी अन्य विशिष्ट शब्द (जैसे उपादान, उपभोग, उपसर्ग आदि) से है, तो 12वीं प्रतिमा उसके साथ कोई पृथक तकनीकी वर्गीकरण नहीं बनाती; मुख्य विषय मुनि-सदृश नियम का दृढ़ पालन है।