किस पति ने किस पत्नी से क्षमा मांगी
जैन धर्म में “क्षमा-याचना” कोई एक पति‑पत्नी की विशेष कथा तक सीमित नहीं है। पर्युषण/दसलक्षण के अंत में—श्वेतांबर परम्परा में सम्वत्सरी और दिगंबर परम्परा में क्षमावाणी के दिन—हर व्यक्ति सब से क्षमा मांगता है। इसी में पति‑पत्नी भी एक‑दूसरे से “मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर क्षमा मांगते हैं। इसलिए “किस पति ने किस पत्नी से” का कोई एक तय नाम नहीं है; यह सार्वत्रिक परम्परा है जहां सभी एक‑दूसरे से क्षमा मांगते हैं।
- श्वेतांबर: सम्वत्सरी के दिन “मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर क्षमा-याचना।
- दिगंबर: क्षमावाणी (दसलक्षण के अंत) पर यही भाव से क्षमा-याचना।
संक्षेप में: जैन आगमिक परम्परा किसी एक पति‑पत्नी का उदाहरण निर्धारित नहीं करती; क्षमा सभी से, सभी के लिए है—पति‑पत्नी भी उसी का भाग हैं। अधिक पढ़ें: