Meaning batae upasgrah shayyanti chidyanti vighna vallayah manh prasannta meti Puja mane jineshware
यह पंक्ति का भावार्थ (सरल अर्थ):
“जिनेश्वर की पूजा करने से उपसर्ग/कष्ट शांत हो जाते हैं, बाधाएँ दूर हो जाती हैं, और मन प्रसन्न व शांत हो जाता है।”
टेक्स्ट (मानक रूप में): “उपासर्गाः शान्त्यन्ति, छिद्यन्ते विघ्नवल्लयः; मनः प्रसन्नतामेति, पूजायां जिनेश्वरे।”
टिप्पणी:
- यह एक प्रचलित स्तुति-वाक्य है जो जैन पूजा-पद्धति में कहा जाता है, अर्थ यही है कि अरिहंत प्रभु की पूजा से विपत्तियाँ शान्त होती हैं और अन्तःकरण निर्मल होता है।
- यह किसी आगमिक सूत्र का शाब्दिक उद्धरण नहीं है; दोनों परम्पराओं (दिगम्बर/श्वेताम्बर) में भाव समान रूप से स्वीकार्य है।