नमोकार ग्रंथ के रचिता कौन है
नमोकार मंत्र (जो कि जैन धर्म का प्रमुख मंत्र है) का मूल स्रोत प्राचीन जैन आगम ग्रंथों में मिलता है और इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा रचित नहीं माना जाता। यह मंत्र अनादि (अनादिकालीन) और स्वयंसिद्ध माना जाता है।
हालाँकि, "नमोकार ग्रंथ" नामक कोई विशिष्ट ग्रंथ अगर पूछा जा रहा है, तो आमतौर पर "नमोकार मंत्र" की व्याख्या या उसके अर्थ पर अनेक आचार्यों ने टीकाएँ और व्याख्यान लिखे हैं। इनमें से प्रसिद्ध टीकाएँ और व्याख्याएँ आचार्य कुंदकुंद, आचार्य उमास्वामी, आचार्य हरिभद्रसूरी आदि ने लिखी हैं।
यदि आप किसी विशेष "नमोकार ग्रंथ" के लेखक के बारे में पूछ रहे हैं, तो कृपया और स्पष्ट करें। सामान्यतः, नमोकार मंत्र के किसी एक लेखक का नाम नहीं है, यह जैन धर्म का मूल और सार्वभौमिक मंत्र है।