Shadhi ke din hi diksha kisne li
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सबसे प्रसिद्ध उदाहरण: भगवान नेमिनाथ (22वें तीर्थंकर) ने अपनी शादी के ही दिन, बारात से लौटकर वैराग्य लेकर दीक्षा ली। वधू राजीमती ने भी बाद में दीक्षा ग्रहण की।
परंपराओं में एक और उदाहरण जम्बूस्वामी का मिलता है—उन्होंने विवाह के तुरंत बाद (अगले ही दिन) दीक्षा ले ली; इसलिए उन्हें भी इसी प्रसंग में याद किया जाता है।
यह प्रसंग श्वेतांबर और दिगंबर—दोनों परंपराओं में प्रसिद्ध है और अहिंसा तथा वैराग्य के आदर्श को दर्शाता है।