जिन्हें लगातार नौ माह तक आहार लाभ नहीं हुआ था
संभवतः आपका संकेत भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की प्रथम आहर-चर्या की ओर है। पर परंपरागत जैन ग्रंथों में “लगातार 9 माह तक आहार लाभ नहीं हुआ” ऐसा उल्लेख नहीं मिलता।
स्वीकृत परंपराएँ:
- श्वेतांबर: लगभग 13 माह 13 दिन (400 दिन) बाद वैशाख शुक्ल तृतीया को राजा श्रेयांस से इक्षुरस का प्रथम आहार।
- दिगंबर: दीक्षा के बाद 6 माह उपवास, फिर लगभग 7 माह 9 दिन तक आहार न मिला; कुल मिलाकर लगभग 13 माह से अधिक समय बाद प्रथम आहार।
इसलिए “9 माह” वाला कथन प्रमाणिक नहीं माना जाता; सही अवधि लगभग 13 माह के आसपास मानी जाती है (परंपरा के अनुसार भेद के साथ).