Mayna sundari ni kis adesh ka chitan kiya tha
Mayna Sundari ने जिन-आदेश (जिनेश्वर की वाणी) का—कि सुख‑दु:ख अपने कर्मों के अनुसार मिलता है—निरंतर चिन्तन किया। इसी भाव से, गुरु-आदेश माने रखकर उन्होंने अष्टाह्निका में सिद्धचक्र महामंडल विधान और नंदीश्वर-व्रत का आराधन कराया, जिसके प्रभाव से श्रीपाल और साथ के 700 व्यक्तियों का कुष्ठ रोग शान्त हुआ।