Palanpue jain mandir me kitne maan chaval chadte the
लगता है आप “पलनपुर” (गुजरात) के जैन मंदिर की बात कर रहे हैं। इस विषय में प्रामाणिक संख्या (कितने “मान/मण” चावल चढ़ते थे) के लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। जैन मर्यादा के अनुसार मंदिर में “अक्षत” (कच्चा चावल) अष्ट-प्रकारी पूजा में केवल थोड़ी मात्रा में चढ़ाया जाता है; “मण” जैसी बहुत बड़ी मात्रा चढ़ाना शास्त्रीय रीति नहीं है। जैन धर्म में अपरिग्रह (अल्प-संग्रह) और अनर्थ-दण्ड से बचने पर बल है; अतः अनाज की अधिकता पूजा में नहीं, बल्कि यदि कहीं स्थानीय परंपरा में दान होता भी हो तो वह प्रायः अन्नक्षेत्र/भंडार हेतु होता है, प्रतिमा-पूजा पर नहीं।
अर्थात, पलनपुर जैन मंदिर में “कितने मण चावल चढ़ते थे” जैसी कोई सर्व-मान्य संख्या जैन शास्त्र या मान्य मर्यादा में नहीं मिलती। सटीक ऐतिहासिक जानकारी चाहिए तो वहीं की मंदिर पेडी/ट्रस्ट के अभिलेख ही प्रमाण होंगे।
अक्षत (चावल) का पूजा में अर्थ और मर्यादा सरल रूप में:
- अक्षत गैर-अंकुरणीय धान्य है—“यह जन्म अंतिम बने” ऐसी भावना का प्रतीक।
- अल्प मात्रा में, श्रद्धा और संयम के साथ अर्पण किया जाता है; अपव्यय वर्जित है।
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