क्या कल्पसूत्र में साबुन न वापरने उल्लेख है?
संक्षिप्त उत्तर: कल्पसूत्र में “साबुन” (modern soap) का सीधा उल्लेख नहीं मिलता।
समझिए कैसे:
- कल्पसूत्र मुख्यतः तीन भागों का ग्रंथ है—जिन-चरित्र, स्थविरावली और “समाचारि” (साधु-साध्वियों के आचरण-नियम)। इसमें आधुनिक वस्तुओं के नाम नहीं आते।
- समाचारि में सिद्धान्त रूप से संयम, साधु-संयमित स्नान, अल्पोपयोग, सुगंध-द्रव्य/आलंकरण आदि से विरति जैसी बातें कही जाती हैं; पर “साबुन” शब्द नहीं है।
- विस्तार से नित्य-आचरण, स्नान-उपयोग और प्रसाधन से विरति के नियम श्वेताम्बर परम्परा में विशेषतः बृहद्काल्पसूत्र, निशीथसूत्र व उनकी भाष्यों में, और दिगम्बर परम्परा में मूलाचार आदि आचार-ग्रन्थों में मिलते हैं।
- इस आधार पर आज साधु-साध्वियाँ अहिंसा और अपरिग्रह के कारण सुगन्धित प्रसाधन/रसायन व अनावश्यक द्रव्यों से बचते हैं; कई जगह आधुनिक साबुन का उपयोग भी त्यागते हैं। गृहस्थों के लिए ऐसा कोई “कल्पसूत्र-आधारित” प्रत्यक्ष निषेध नहीं दिया गया, पर अहिंसा-अपरीग्रह की भावना से सरल, प्राणिहिंसा-रहित विकल्प अपनाने की प्रेरणा है।