क्या कल्पसूत्र लिखा गया जब साबुन का आविष्कार हो गया था
संक्षेप में: हाँ—यदि “साबुन” से आपका आशय चर्बी/तेल और क्षार (राख/ऐल्कली) से बने साफ़ करने वाले पदार्थ से है, तो ऐसा साबुन कल्पसूत्र की रचना-काल से बहुत पहले ज्ञात था। पर “आधुनिक बाथ/टॉयलेट बार” वाला साबुन कल्पसूत्र के कई शताब्दियों बाद प्रचलित हुआ।
थोड़ा विस्तार से:
- कल्पसूत्र श्वेतांबर परंपरा का ग्रंथ है, परंपरानुसार इसकी रचना आचार्य भद्रबाहु द्वारा लगभग 4वीं–3री शताब्दी ईसा-पूर्व मानी जाती है और यह पर्यूषण में पाठित होता है। दिगंबर परंपरा इसे आगम-स्वरूप नहीं मानती/उपयोग में नहीं रखती।
- साबुन जैसे पदार्थ (तेल/चर्बी + क्षार से बने क्लीनज़र) प्राचीन सभ्यताओं में कल्पसूत्र के बहुत पहले से जाने जाते थे। हाँ, कठोर “टॉयलेट सोप” के रूप में नहाने का साबुन मध्यकाल/आधुनिक युग में व्यापक हुआ, जो कल्पसूत्र के काफी बाद की बात है।
अर्थात, मूल “साबुन का आविष्कार” कल्पसूत्र से पहले का है; लेकिन आज जैसा तैयार बाथ सोप बाद में आया।