महानिशीथ सूत्र की रचना
महानिशीथ सूत्र की रचना (लेखन-परंपरा)
- श्वेताम्बर परंपरा: महानिशीथ सूत्र किसी एक व्यक्ति द्वारा “लिखा” गया ग्रंथ नहीं है। यह भगवान महावीर की वाणी (आगम) का संकलन है, जिसे गणधर–परंपरा से मठ–परंपरा तक मौखिक रूप से संरक्षित किया गया और बाद में चेदसूत्रों के समूह में व्यवस्थित किया गया। इसका अंतिम संहिताकरण/संशोधन वल्लभी परिषद में देवर्धिगणि क्षमाश्रमण (5वीं–6वीं शताब्दी ई.) के समय मान्य माना जाता है। इसलिए इसके “रचयिता” के रूप में कोई एक नाम नहीं दिया जाता; इसे तीर्थंकर-वाणी का संकलित आगम माना जाता है।
- दिगम्बर परंपरा: दिगम्बर परंपरा श्वेताम्बर आगम-संग्रह (जिसमें महानिशीथ भी आता है) को प्रामाणिक आगम रूप में स्वीकार नहीं करती; अतः उनके यहाँ इसकी रचना/लेखक का प्रश्न नहीं उठता।
संक्षेप में: महानिशीथ सूत्र भगवान महावीर की वाणी का संकलित आगम है; व्यक्तिगत लेखक-नाम नहीं। श्वेताम्बर परंपरा इसे चेदसूत्रों में मानती है और वल्लभी (प्राचीन काल) में संहिताकरण स्वीकार करती है, जबकि दिगम्बर परंपरा इसे आगम रूप में नहीं मानती।
संदर्भ: श्वेताम्बर आगमों में महानिशीथ के स्वरूप तथा टीका-परंपरा पर संक्षिप्त परिचय देखें