Porsi ke baad ane wale pachkan
पोरसी (Porsi) के बाद जो 'पच्चन' (Pachkan) दिया जाता है, वह जैन धर्म की परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण है। 'पच्चन' का अर्थ है— कोई संकल्प या व्रत लेना। पोरसी के बाद पच्चन लेने का मुख्य उद्देश्य यह है कि व्यक्ति अगले निश्चित समय तक अन्न–जल आदि ग्रहण नहीं करेगा, और अपने नियमों का पालन करेगा।
आम तौर पर, जैन धर्म में दिन में चार बार खाने के नियम (चौविहर) रहते हैं— पोरसी, सायं, रात्री और चौमासु। इन समयों के बाद भोजन/पेय ग्रहण नहीं किया जाता। पोरसी के बाद पच्चन लेने की विधि सरल है:
पच्चन का अर्थ: – अब मैं अमुक समय तक (जैसे– सायं के समय तक) कुछ भी अन्न, जल, दूध, फल, आदि ग्रहण नहीं करूंगा/करूंगी। – मैं इस अवधि में रात्रि भोजन का त्याग, जीव हिंसा से बचाव, और जैन नियमों का पालन करूंगा/करूंगी।
पच्चन बोलने का तरीका (उदाहरण): "मुझे पोरसी के बाद सायं तक का पच्चन दीजिए। मैं अब सायं के समय तक कुछ भी अन्न, जल, दूध, फल आदि ग्रहण नहीं करूंगा/करूंगी। मैं इस अवधि में जैन धर्म के नियमों का पालन करूंगा/करूंगी।"
महत्व: पच्चन लेने से अनुशासन, संयम और नियम–पालन की भावना दृढ़ होती है। यह आत्म–संयम और तपस्या का एक अंग है।
यदि आपको किसी खास प्रकार के पच्चन या उसकी विधि चाहिए तो कृपया स्पष्ट करें।