Pachkhan in hindi
पच्छखाण (Pachkhan) क्या है
- पच्छखाण = “प्रत्याख्यान/नियम” लेना। यानी देव–गुरु–धर्म को साक्षी मानकर किसी नियम/व्रत को निश्चित समय के लिए दृढ़ संकल्प से स्वीकार करना।
- उद्देश्य: कषायों पर संयम, भोजन–पान में मर्यादा, हिंसा में न्यूनता और साधना में नियमितता।
- शब्द-प्रयोग: श्वेतांबर परम्परा (विशेषतः तेरापंथ) में “पच्छखाण” शब्द प्रचलित है; दिगंबर परम्परा में यही भाव “प्रत्याख्यान/नियम” के नाम से लिया जाता है। भाव दोनों में एक ही है—संयम का दृढ़ संकल्प।
पच्छखाण कैसे लें (सरल विधि) 1) शांत भाव से नवकार मंत्र जपें। 2) देव–गुरु–धर्म को साक्षी मानकर अपना नियम स्पष्ट बोलें: क्या, कब से, कब तक, किन मर्यादाओं सहित। 3) नियम के दौरान अपवाद/दवा इत्यादि हो तो पहले से स्पष्ट कहें। 4) अंत में “मिच्छामी दुक्कडं” कहें और मन में स्थिरता रखें।
तैयार हिन्दी प्रारूप (आप अपनी आवश्यकता अनुसार अवधि/दिनांक बदलें) 1) रात्रिभोजन त्याग “मैं आज से अगले आदेश/तिथि … तक सूर्यास्त के बाद अन्न–जल का त्याग रखूंगा/रखूंगी। नियम भंग न हो, ऐसी मेरी भावना। मिच्छामी दुक्कडं।”
2) उबला/छाना जल नियम “मैं आज दिनांक … से … तक केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच उबला/छाना हुआ जल ही ग्रहण करूंगा/करूंगी, रात में जल नहीं। मिच्छामी दुक्कडं।”
3) उपवास/एकोasana/बियासन “मैं आज … तिथि को … व्रत (उपवास/एकोasana/बियासन) करूंगा/करूंगी; सहायक द्रव्यों में केवल … स्वीकार करूंगा/करूंगी। मिच्छामी दुक्कडं।”
4) हरित–कंद–मूल त्याग (निर्दिष्ट दिन) “मैं … वार/पर्व तक हरे शाक, कंद–मूल, मादक द्रव्य, अंडा इत्यादि का त्याग रखूंगा/रखूंगी। मिच्छामी दुक्कडं।”
5) नवकारशी/पोरसी नियम “मैं … तिथि तक प्रातः नवकारशी/पोरसी से पूर्व कुछ भी नहीं लूंगा/लूंगी; समय मर्यादा का पालन करूंगा/करूंगी। मिच्छामी दुक्कडं।”
6) मोबाइल–वाणी संयम (साधना हेतु) “मैं आज … से … तक असत्य, कठोर वाणी और अनावश्यक मोबाइल/सोशल मीडिया का त्याग रखूंगा/रखूंगी। मिच्छामी दुक्कडं।”
ध्यान रखने योग्य
- नियम स्पष्ट, समयबद्ध और अपने सामर्थ्य के अनुसार लें।
- स्वास्थ्य/औषधि अपवाद पहले से बोल दें।
- नियम टूट जाए तो उसी क्षण पश्चाताप करके पुनः संयम का संकल्प लें।
- पच्छखाण प्रातिक्रमण, सामायिक, उपवास आदि साधनाओं के साथ सबसे प्रभावी होता है।
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