सीता ने किस भव मे मुनिराज पर कलंक लगाया
जैन परम्परा (विशेषतः श्वेताम्बर ग्रंथ-परंपरा) के अनुसार सीता ने अपने पूर्व भव में “वेगवती” नामक युवती रूप में एक निर्दोष मुनिराज “सुदर्शन मुनि” पर मिथ्या कलंक लगाया था। उसी पापबंध के उदय से उनके सीता-भव में उन्हें कलंक-परिस्थिति सहनी पड़ी, यद्यपि वे महासती थीं।
टिप्पणी
- श्वेताम्बर परंपरा में यह प्रसंग विस्तार से आता है (त्रिषष्टि शलाकापुरुष चरित्र आदि में).
- दिगम्बर रामायण-परंपरा (पद्मपुराण/पउमचरियं) में भी सीता के पूर्वकृत कर्मों के उदय से कलंक-विधान का हेतु बताया गया है, यद्यपि पात्र-नामों की विवक्षा भिन्न मिलती है; सिद्धान्त एक ही है कि मिथ्या-अपवाद का कषायबंध फल देता है।
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