25 क्रियाओ के नाम
जैन दर्शन में “25 क्रियाएँ” (पञ्चविंशति-क्रिया) वे कर्म-उदय/आस्रव कराती गतिविधियाँ हैं जिनका वर्णन गोम्मटसार (कर्मकाण्ड) में मिलता है। उनके नाम:
1) सम्यक्त्व-क्रिया 2) मिथ्यात्व-क्रिया 3) प्रयोग-क्रिया 4) समाधान-क्रिया 5) ईर्यापथ-क्रिया 6) प्रदोोषिकी-क्रिया 7) कायिकी-क्रिया 8) अधिकारणिकी-क्रिया 9) परितापिकी-क्रिया 10) प्राणातिपातिकी-क्रिया 11) दर्शन-क्रिया 12) स्पर्शन-क्रिया 13) प्रत्यायिकी-क्रिया 14) समन्तानुपातन-क्रिया 15) अनाभोग-क्रिया 16) स्वहस्त-क्रिया 17) निषर्ग-क्रिया 18) विद्यरण (विदारण)-क्रिया 19) आज्ञा-व्यापादिकी-क्रिया 20) अनाकांक्षा-क्रिया 21) प्रारम्भ-क्रिया 22) परिग्राहिकी-क्रिया 23) माया-क्रिया 24) मिथ्या-दर्शन-क्रिया 25) अप्रत्याख्यान-क्रिया
परम्परा-सूचना:
- यह सूची मुख्यतः दिगम्बर आगम-परम्परा के ग्रन्थ गोम्मटसार (कर्मकाण्ड) में मिलती है।
- श्वेताम्बर परम्परा में भी आस्रव के कारणों का वर्णन है, किन्तु “25 क्रिया” के रूप में यह निश्चित सूची प्रचलित नहीं मानी जाती; मूल भाव समान है कि मन-वचन-काय की अशुद्ध प्रवृत्तियाँ कर्म-बन्ध का कारण बनती हैं।