दण्ड क्रियाओ के नाम
जैन धर्म में “दण्ड-क्रिया” सामान्यतः त्रिदण्ड (तीन प्रकार की क्रिया) के रूप में समझी जाती है—जिनसे पाप/हिंसा होती है:
1) मनोदण्ड (मन से) – गलत सोचना, द्वेष, कषाय, हिंसक/अशुभ संकल्प। 2) वचनदण्ड (वाणी से) – कठोर/असत्य/अपशब्द बोलना, चुगली, कलह भड़काना। 3) कायदण्ड (देह से) – प्रत्यक्ष हिंसा, चोरी, कुशास्त्र/कुकर्म से प्राणी पीड़ा देना।
टीका: