दण्ड क्रिया कौन कौन सी है
जैन दर्शन में “दण्ड-क्रिया” से आशय कर्म बाँधने वाली तीन प्रकार की क्रियाओं से है। इन्हें त्रिदण्ड कहा जाता है:
- मनोदण्ड: मन से सोचना/इच्छा करना (मानसिक क्रिया)
- वचनदण्ड: वाणी से बोलना (वाचिक क्रिया)
- कायदण्ड: शरीर से करना (शारीरिक क्रिया)
इन्हीं तीन दण्डों के द्वारा पाप-पुण्य के कर्म बँधते हैं, इसलिए इन्हें संयम में रखना आवश्यक माना गया है। Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में यही त्रिदण्ड स्वीकार किए गए हैं।