Pastu parath kya hai
शायद आप “Vastu–Paryāy” (वस्तु–पर्याय) पूछ रहे हैं।
- Vastu (वस्तु/द्रव्य): वह स्थायी सत्ता/द्रव्य जो अपनी पहचान बनाए रखता है। जैन दर्शन में 6 द्रव्य हैं—जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश, काल। द्रव्य नित्य है (अपनी सत्ता में स्थिर)।
- Paryāy (पर्याय): उसी वस्तु/द्रव्य की क्षण-क्षण होने वाली अवस्थाएँ या परिवर्तन। पर्याय अनित्य है (बदलती रहती है)।
मुख्य बात
- “नित्यत्त्व–अनित्यत्त्व का सह-अस्तित्व”: द्रव्य (वस्तु) नित्य है, पर उसकी पर्यायें निरंतर बदलती रहती हैं।
- उदाहरण:
दिगम्बर और श्वेताम्बर—दृष्टि
- दोनों परंपराएँ द्रव्य–गुण–पर्याय के सिद्धान्त को स्वीकारती हैं; द्रव्य नित्य और पर्याय अनित्य मानती हैं। व्याख्या-शैली में सूक्ष्म भेद हो सकते हैं, पर मूल सिद्धान्त समान है (तत्त्वार्थसूत्र में दोनों परंपराएँ इस सिद्धान्त को प्रमाण मानती हैं)।
संक्षेप में: Vastu मतलब द्रव्य (जो रहता है), Paryāy मतलब उसी का रूप-परिवर्तन (जो बदलता है)।