तेला करने से पहले का पचखान
नीचे “तेला (चन्दन/केसर लेप) करने से पहले” बोले जाने वाला सरल पचखान दिया है। यह श्वेतांबर मूर्तिपूजक परंपरा में प्रचलित है; शब्दावली स्थान–परंपरा अनुसार थोड़ी बदल सकती है, पर भाव यही रहता है।
सरल पचखान (हिन्दी)
- मुझे तेला करने का पचखान दीजिए।
- मैं अहिंसा, संयम और शुद्ध भाव से, किसी भी जीव को कष्ट पहुँचाए बिना, प्रभु के चरणों में तेला करूँगा/करूँगी।
- इस क्रिया में कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) से रहित रहूँगा/रहूँगी, और नियमों का पालन करूँगा/करूँगी।
- यदि कोई दोष हो जाए तो “मिच्छामि दुक्कडं”।
संक्षिप्त विधि (तेला से पहले)
- मन–वचन–काय की शुद्धि करें, नवकार मंत्र का स्मरण करें।
- पूजा–स्थान और द्रव्य (चन्दन/केसर, जल आदि) की शुद्धि रखें; जीव हिंसा से बचें।
- ऊपर दिया पचखान लें, फिर शांत भाव से तेला करें।
- अंत में क्षमायाचना करें: “मिच्छामि दुक्कडं।”
भावार्थ
- तेला का अर्थ केवल लेप लगाना नहीं, बल्कि ज्ञान–शीतलता, पवित्रता और अहिंसा को अपने जीवन में उतारने का संकल्प है। पचखान से यही नियम दृढ़ किया जाता है।
परंपरा–भेद
- श्वेतांबर मूर्तिपूजक: तेला/चन्दन-अभिषेक के पहले ऐसा पचखान लेकर फिर अष्टप्रकारी पूजा की क्रमबद्ध क्रियाएँ की जाती हैं।
- दिगंबर: “तेला” शब्द प्रचलित नहीं; वहाँ अभिषेक/चन्दन-लेपन आदि से पूर्व सामान्य पूजा-संकल्प (पचखान) लिया जाता है। भाव वही—अहिंसा, संयम, शुद्धि।
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नोट: अलग संघ/गच्छ में पचखान का वाक्य-विन्यास भिन्न हो सकता है; पर कृपा, अहिंसा, शुद्धि और क्षमा का यही मूल भाव सुरक्षित रखा जाता है।