क्या विवाह के सन्दर्भ में वर वधू की कुंडली मिलान आवश्यक हे
संक्षिप्त उत्तर: Jain Dharma में विवाह के लिए कुंडली मिलान धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। यह कुछ परिवारों की सामाजिक/परंपरागत पसंद हो सकती है, पर शास्त्रीय दृष्टि से आवश्यक नहीं।
जैन दृष्टि से क्या महत्वपूर्ण है
- धर्म-संस्कार: अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य का आदर, अपरिग्रह की भावना, नशामुक्ति, शुद्ध शाकाहार/व्रतों का पालन।
- सम्यक् दृष्टि और साधना: जैन धर्म में आस्था, स्वाध्याय, प्रातिक्रमण, समायिक जैसी दिनचर्या के प्रति अनुकूलता।
- गुण और संगति: परस्पर सम्मान, संयमित जीवन, क्रोध-लोभ का संयम, जीवन-लक्ष्य जो आत्मिक प्रगति में सहायक हों।
- व्यवहारिक सामंजस्य: स्वभाव, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार के संस्कार, आर्थिक स्पष्टता और जिम्मेदारी।
कुंडली के बारे में
- कुंडली देखना चाहें तो उसे केवल एक पारिवारिक परंपरा मानें, अंतिम निर्णय का आधार न बनाएं।
- किसी “दोष निवारण” के नाम पर हिंसक, अपव्ययी या अंधविश्वासी कर्मकांड जैन धर्म में स्वीकार्य नहीं।
- सुख-दुःख का मूल कारण अपने कर्म हैं; सही पुरुषार्थ, संयम और धर्मानुष्ठान ही कल्याण का मार्ग हैं।
करने योग्य शुभ साधनाएँ
- निर्णय से पूर्व नवकार मन्त्र का जाप, क्षमा-याचन, स्वाध्याय/समायिक से मन की शुद्धि।
- बड़ों का आशीर्वाद लेकर सादगी, अहिंसा और सत्य पर आधारित विवाह-संस्कार।