मेरी मेष राशि हे मेरी संपत्ति बेचने का उचित समय क्या होगा
जैन धर्म के अनुसार संपत्ति बेचने जैसा निर्णय “राशि/ज्योतिष” पर नहीं, बल्कि सम्यक् दृष्टि, संयम और अपरिग्रह (संपत्ति‑मोह को घटाना) पर आधारित होना चाहिए। इसलिए “मेष राशि” देखकर समय तय करना आवश्यक नहीं है।
जैन दृष्टि से क्या ध्यान रखें:
- अपरिग्रह: जब बेचने से आसक्ति घटती हो, जीवन सरल होता हो या धर्म‑उपयोग में सहायता मिलती हो, तब समय उपयुक्त है। अपरिग्रह के व्रत का भाव रखें।
- सत्य और अहिंसा: लेन‑देन पूरी सत्यनिष्ठा से करें; किसी प्रकार का छल, गलत वचन या तौल‑माप की त्रुटि न हो।
- शुद्ध भाव: प्रारंभ में नवकार मंत्र का स्मरण करें, और यदि किसी प्रकार का संकोच/मोह हो तो प्रातिक्रमन करके अंतरात्मा को शुद्ध करें। प्रातिक्रमन का संक्षेप व महत्व देखें:
- व्यावहारिक बुद्धि: खरीदार की तैयारी, कानूनी कागज़ात की स्पष्टता, बाज़ार‑स्थिति और परिवार की सहमति—इन आधारों पर तिथि चुनें; ये ही वास्तविक “शुभ” हैं।
- पुण्योपयोग: लेन‑देन से मिली राशि में से अपनी क्षमता अनुसार दान/धर्म‑कार्य में लगाने का संकल्प रखें।
संक्षेप में: जैन धर्म में संपत्ति बेचने का “राशि‑आधारित” शुभ समय नहीं बताया गया है। आसक्ति घटाने, सत्य‑अहिंसा का पालन करने और शुद्ध भाव से, जब व्यावहारिक रूप से सब अनुकूल हो—वही उचित समय है।