Aprathisthan ke narag vasi kitne yojan I lambai hoti hae
अप्रतिष्ठान (सातवीं नरक, महातमःप्रभा) के नरकवासियों का देहमान (ऊँचाई) अधिकतम 500 धनुष बताया गया है। ( jainqq.org)
धनुष से योजन में साधारण जैन-परिमाण के अनुसार:
- 4000 धनुष ≈ 1 योजन माना जाता है; इस आधार पर 500 धनुष = 1/8 योजन = 0.125 योजन (लगभग)। ( ro.scribd.com, scribd.com)
टिप्पणी:
- यह संख्या तत्त्वार्थसूत्र/गणितानुयोग जैसे प्रामाणिक जैन ग्रंथों में दी गई परंपरागत माप पर आधारित है; श्वेतांबर–दिगंबर दोनों परंपराओं में सातवीं नरक पर देहमान का मान 500 धनुष के रूप में समान रूप से वर्णित है। ( jainqq.org)
- ग्रंथों में यह भी कहा है कि नारकी जीव वैक्रिय शरीर से अपने देहमान का दोगुना आकार क्षणिक रूप से बना सकते हैं; परंतु मूल मान 500 धनुष ही माना जाता है। ( jainqq.org)