भगवान महावीर के समय कितने आश्चर्य हुए
संक्षेप में:
- भगवान महावीर के केवली बनने के बाद उनके समवसरण में “चप्पन्न (56) आश्चर्य” प्रकट होते हैं। इसे ही सामान्यतः “समवसरण के 56 आश्चर्य” कहा जाता है।
- साथ ही तirthंकर के प्रवचन-स्थल पर “अष्ट-प्रatihārya” (8 मंगल-आभूषण/चमत्कार) भी वर्णित हैं, जैसे सिंहासन, छत्र, चामर, भामंडल (दीप्ति), पुष्पवृष्टि, देवदुंदुभि इत्यादि।
परंपरा-सम्बंधी नोट:
- श्वेताम्बर और दिगम्बर—दोनों परंपराओं में समवसरण के “56 आश्चर्य” स्वीकार हैं; सूची/वर्णन में हल्का-सा भेद कहीं-कहीं मिल सकता है, पर संख्या वही रहती है।
- “अष्ट-प्रatihārya” की अवधारणा भी दोनों में मान्य है।
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