Dashvaikalika sutra mai kaunse jaari ke saap ko sreast bataya gaya hai????
आपका प्रश्न जैन धर्मग्रंथ “दसवैकालिक सूत्र” से जुड़ा है, लेकिन “झाड़ी (jaari) के साँप को श्रेष्ठ बताया गया है” — ऐसा स्पष्ट वाक्य/निर्णय मुझे इस सूत्र में प्रमाणित रूप से नहीं मिलता। यह ग्रंथ मुख्यतः साधु आचार, संयम, विनय और सावधानी पर केंद्रित है; साँप आदि के उदाहरण जहाँ आते हैं, वे उपमाएं हैं, न कि किसी विशेष “झाड़ी/बिल/वन” के साँप की श्रेष्ठता का वर्गीकरण।
यदि आपके पास उस गाथा/अध्ययन (adhyayana) का सटीक संदर्भ या पंक्ति हो, तो उसी के आधार पर मैं पारंपरिक अर्थ सहित शुद्ध व्याख्या दे सकता हूँ।