18 प्रकार के अन्न कौन से हैं
क्षमा करें—जैन आगमों में “18 प्रकार के अन्न” की कोई प्रमाणित (परंपरागत) सूची नहीं मिलती। जैन धर्म में भोजन/आहार का सामान्य और प्रामाणिक विभाजन 4 प्रकारों में बताया गया है:
- भक्ष्य: जिसे चबा‑चबा कर खाया जाए (जैसे रोटी, सब्ज़ी के टुकड़े)
- भोज्य: जिसे निगल कर खाया जाए/मुंह में गल जाता है (जैसे खिचड़ी, खीर)
- लेह्य: जिसे चाट कर लिया जाए (जैसे शहद/चटनी जैसा रूप; जैनाचार में संयमपूर्वक)
- पेय: जिसे पिया जाए (जैसे जल, दूध आदि)
यह चार‑विभागी आहार‑वर्गीकरण श्वेतांबर और दिगंबर—दोनों परंपराओं में स्वीकार्य है। जैन आचार का मुख्य उद्देश्य अहिंसा और संयम है; इसलिए जड़ (भूमिगत) कंद‑मूल, अंडा आदि का त्याग, बासी भोजन से बचना, और सरल-सात्त्विक आहार रखना बताया गया है।