नव तत्त्व के नाम
नव तत्त्व के नाम 1) जीव (Jīva) 2) अजीव (Ajīva) 3) आस्रव (Āsrava) 4) बन्ध (Bandha) 5) संवर (Saṃvara) 6) निर्जरा (Nirjarā) 7) मोक्ष (Mokṣa) 8) पुण्य (Puṇya) 9) पाप (Pāpa)
टिप्पणी:
- दिगम्बर और श्वेताम्बर—दोनों परम्पराएँ इन 9 तत्त्वों को स्वीकार करती हैं। कुछ ग्रन्थों में 7 तत्त्व (पुण्य–पाप को अलग रखकर) भी बताये जाते हैं, पर नव तत्त्वों की सूची यही मानी जाती है।
- सार: जीव पर कर्म का आस्रव और बन्ध होता है; संवर और निर्जरा से कर्म रुकते-झड़ते हैं; अन्ततः मोक्ष होता है। पुण्य–पाप सुख–दुःख के अनुभव देने वाले कर्मफल हैं।