Bhagwan mahaveer Vidya adhyayan ke liye Gaye tab kaun se vyakaran Granth ki Rachna Hui
प्रामाणिक जैन आगमों (जैसे आचारांग-सूत्र, कल्पसूत्र आदि) और परम्परागत चरित-ग्रन्थों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि जब भगवान महावीर विद्या-अध्ययन के लिए गए, तब किसी “व्याकरण-ग्रन्थ” की रचना हुई हो। इसलिए—जैन परम्परा के प्रमाणित ग्रन्थों के आधार पर—ऐसा कथन सही नहीं माना जाता।
स्पष्टता के लिए:
- “जैनेंद्र व्याकरण” (आचार्य पूज्यपाद) और “सिद्ध-हेम शब्दानुशासन” (आचार्य हेमचन्द्र) प्रसिद्ध जैन व्याकरण-ग्रन्थ हैं, पर ये भगवान महावीर के बहुत बाद (शताब्दियों बाद) रचे गए हैं—महावीर के छात्र-काल में नहीं।
- इस विषय में दिगम्बर और श्वेताम्बर—दोनों परम्पराओं के प्रामाणिक ग्रन्थों में भी ऐसी कोई उल्लेखित घटना नहीं मिलती।