आचार क्रिया दया स्वभाव ये किसके भेद है
आचार, क्रिया, दया, स्वभाव — ये “धर्म के चार भेद” हैं।
संक्षिप्त अर्थ
- आचार-धर्म: व्रत, नियम, संयम और शुद्ध आचरण का पालन (सम्यक् चरित्र)।
- क्रिया-धर्म: पूजा, वंदना, स्वाध्याय, तप आदि शारीरिक/वाचिक शुभ कर्म, जिन्हें सम्यक् भाव से किया जाए।
- दया-धर्म: सभी जीवों पर करुणा, अहिंसा, क्षमा और उपकार का भाव।
- स्वभाव-धर्म: आत्मा का निज-स्वभाव—शुद्धोपयोग; राग-द्वेष से रहित होकर आत्मा में स्थित रहना—यह सर्वोच्च माना गया है।
परंपरागत टिप्पणी
- दिगंबर और श्वेतांबर—दोनों परंपराएँ इन चार भेदों को स्वीकार करती हैं; विशेषतः “स्वभाव-धर्म = शुद्धोपयोग” को उच्चतम धर्म माना गया है।