Dashvaikalika sutr mai asthirtaar आत्मा की तुलना किस वनस्पति से की गई है ???
मेरी जानकारी में दशवैकालिक सूत्र में “अस्थिर (अस्थिरतार) आत्मा” की किसी विशेष वनस्पति से सीधी उपमा नहीं दी गई है। दशवैकालिक मुख्यतः साधु‑आचरण, अहिंसा और छह प्रकार के जीव (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, वनस्पति, त्रस) के वर्णन पर केंद्रित है; इसमें वनस्पतियों के भेद (अग्रबीज, मूलबीज, पर्वबीज, स्कन्धबीज, बीजरुह, संमूर्च्छिम, तृण‑लता आदि) बताए गए हैं, पर आत्मा की अस्थिरता की तुलना किसी एक पौधे से नहीं की गई। शास्त्रों में “कदली/कदली‑वृक्ष (केले)” जैसी उपमाएँ प्रायः देह/संयोग की असारता के संदर्भ में अन्य आगम/ग्रन्थों में मिलती हैं, न कि दशवैकालिक के मूल सूत्र में।
दशवैकालिक सूत्र और वनस्पति‑कायिक जीवों के संदर्भ में सरल विवरण के लिए देखें: