कौनसे जाती के सांप को श्रेष्ठ बताया गया है इन dashvaikalika सूत्र???
दशवैकालिक सूत्र में “अगन्धन-कुल” के सर्प को आदर्श/श्रेष्ठ उदाहरण के रूप में बताया गया है। अर्थ यह है कि अगन्धन-कुल का सर्प अपना उगला हुआ विष पुनः नहीं चूसता; वह प्राण देकर भी पीछे नहीं हटता—ठीक वैसे ही साधक को संयम और व्रत में अटल रहना चाहिए। इसके विपरीत “गन्धन-कुल” के सर्प मंत्रबल से बुलाए जाने पर विष वापस चूस लेते हैं, इसलिए उन्हें यहाँ आदर्श नहीं माना गया है।
यह वर्णन श्वेतांबर आगम ‘दशवैकालिक सूत्र’ (अध्ययन 2, गाथा 11–13) में आता है। Digambar परंपरा में यह आगम प्रामाणिक ग्रंथों की सूची में नहीं है, इसलिए यह संदर्भ मुख्यतः श्वेतांबर परंपरा का है।