ओत्पतिकी बुद्धि का उदाहरण जो खाने की चीज है
संक्षिप्त उत्तर: खाने की चीज का सरल उदाहरण — जीभ पर चीनी/गुड़ लगते ही “मीठा” की जो तुरन्त समझ उत्पन्न होती है, यह ओत्पतिकी (उत्पत्तिकी) बुद्धि का उदाहरण है। इसी प्रकार मिर्च लगते ही “तीखा” जानना भी।
जैन दृष्टि से अर्थ:
- ओत्पतिकी/उत्पत्तिकी बुद्धि वह ताज़ा, तुरन्त उत्पन्न होने वाली समझ है जो इन्द्रिय‑सन्निकर्श से एकदम प्रकट हो जाती है; इसमें अधिक चिन्तन या पूर्व‑स्मृति का सहारा नहीं होता।
- यह मति‑ज्ञान की परिधि में आती है, जहाँ इन्द्रियों के माध्यम से वस्तु का प्रथम ग्रहण होता है और “मीठा–खारा–तीखा” जैसी त्वरित धारणा बनती है।
- दिगम्बर और श्वेताम्बर—दोनों परम्पराएँ इन्द्रियाधिष्ठित तात्कालिक अनुभूति (मति‑ज्ञान) को स्वीकार करती हैं; पदावली/वर्गीकरण में सूक्ष्म भेद हो सकते हैं, पर उपर्युक्त उदाहरण दोनों में मान्य है।
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