Uvvsaghram strotra full
Uvassagharam Stotra (Uvasaggaharam Stotra) की पूर्ण पाठ (5 श्लोक)
ध्यान दें: नीचे देवनागरी पाठ वही है जो आम तौर पर प्रचलित संस्करणों में मिलता है। कुछ परंपराओं में संस्करण में सूचीय भिन्नताएँ हो सकती हैं, पर मूल भावना Parshvanath की पूजन और बाधाओं के हटाने की है।
1) उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण मुक्कं विसहर विष्-नििन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं
Meaning (arth): मैं पार्वषणाथ भगवान की वन्दना करता/करती हूँ—जो बाधाओं को दूर करने वाले यक्ष-देव से समर्थित हैं, जो सभी karmas से मुक्त हैं, जो विषैला कर्मों से विषस्तर को नाश करने वाले हैं, और सुख-कल्याण के निवास स्थान हैं।
2) Visahar-fulingmantaṁ, kaṇṭhe dhārei jo sayā manuō Tassa gah roga mārī, dutṭha jarā janti uvāsāmaṁ
Meaning: जो Visahar फुल्लिंग मंत्र को सदा गले में धारण करके रखता/रखती है, उसके कारण ग्रह-रोग, महामारी, तीव्र ज्वर आदि शांत होते हैं।
3) Ciṭṭhau dürē mantō, tujh pašāmo vi bahu phalō hōi Naratirīesu vi jīvā, pāvanti na dukh-dogaccam
Meaning: वह मंत्र दूर रहने पर भी, आपकी वंदना से अति फल प्राप्त होते हैं; मनुष्य-जीव परम सुख-भव पाते हैं और दुःख-दोगच्छ नहीं आते।
4) Tuha sammatte laddhe, cintāmani kappapāyavabbhāhie Pāvanti avighṇeṇam, jivā ayarāmaraṁ thāṇam
Meaning: आपकी सम्ज्ञान से जीवन संभवतः चित्त-रत्न और कल्पवृक्ष के समान आश्रम देता है; जीव spectra-विहग्न से मुक्त होकर आयर-आश्रम पाते हैं।
5) Eta santhuo mahāyasa, bhatti-bhara nibbhareṇ hiyāêṇ Ta deva dijja bohin, bhave bhave pāsa jiṇachanda
Meaning: ओ महायशस्वी पार्श्वनाथ! मैंने आपकी स्तुति पूरी श्रद्धा से की; आप देवों-डिज्ज (जिन) को बार-बार पास जिणचंद दीजिए।
स्पष्ट बात: Digambar बनाम Shwetambar परंपराओं में समान पाठ अधिकतर है; कुछ संस्करणों में अतिरिक्त/भिन्न श्लोक हो सकते हैं, या किसी एक श्लोक को मूल पाठ से माना नहीं जाता। अधिकांश tradition 5 श्लोक स्वीकारते हैं। कुछ मौकों पर एक विशेष श्लोक को छोड़कर पढ़ना भी किया जाता है, जिसे अलग-अलग संस्करणों में कहा गया है कि बाद में जोड़ा या हटाया गया हो।
अगर आप चाहें, मैं इस पाठ के सरल शब्द-समझ (स्थूल अर्थ) को बनाकर दे सकता/सकती हूँ या आपको केवल पाठ के Digambar/Shwetambar भेद बताकर दे सकता/सकती हूँ।
जैन ज्ञान के संदर्भ के लिए देखें: