Chaas kitni raat baad abhakshya hoti he
Chaas (बटरमिल्क) के बारे में जैन परमपराओं में कहा गया है कि दही/चाश का भक्षण आरम्भिक दिनों में हल्का माना जाता है, पर कुछ समय बाद वह अभक्ष्य हो सकता है. सामान्य rule यही है कि दही/चाश को ताज़ा ही पिया जाना चाहिए; अगर वह तीन से अधिक दिनों तक रखा जाए या रात भर रखा जाए, तो उसे अभक्ष्य माना जा सकता है. स्रोतों में दही/छाछ को “ताज़ा और एक दिन के अंदर” लेने की सलाह मिलती है, वरना अभक्ष्य हो सकता है। इस विषय पर अलग-लग संप्रदायों में कुछ छोटे भेद भी मिलते हैं, पर मूल भावना वही है: हिंसा कम से कम रखने हेतु ताज़ा दुध-उत्पादन से बना पदार्थ ही ग्रहण करना बेहतर माना गया है। You can read more here