Guru bhgwant andhere me kaunsi aradhana karte hai
संक्षेप में: जैन धर्म में “गुरु भगवन्त/गुरु भगवान” के रूप में किसी जीवित गुरु की पूजा देवी-देवता की तरह नहीं की जाती। मुख्य आराधना तीर्थंकरों (जिन्हें आचार्य नहीं बल्कि भगवान के समान माना जाता है) और उनके आराधना-प्रणालियों के अनुसार होती है। कुछ संप्रदायों में आचार्यों/गुरुओं का सम्मान और श्रद्धा दिखाने की आदत होती है, पर उसे देवी-देवता की तरह पूजा नहीं माना जाता; वह शिक्षिका-गुरु के रूप में संभव है, न कि दिव्य रूप में।
नोट:
- Digambar और Śvetambar परंपराओं के बीच कुछ स्थानीय/संस्कृतिक भिन्नताएँ हो सकती हैं, जैसे आचार्यों के सम्मान के तरीके या पाठों की प्रस्तुति, लेकिन दोनों में प्राथमिक आराधना तीर्थंकरों तक सीमित रहती है।
- अगर आपका सवाल किसी खास संप्रदाय, पाठ या प्रथा के बारे में है (जैसे किसी विशिष्ट गुरु-पूजा या आचार्य-उपासना), कृपया उसका स्पष्ट संदर्भ दें ताकि मैं उसी के अनुसार सही विवरण दे सकूँ।
ध्यान दें: अगर आप कोई विशेष सूत्र या स्तोत्र का अर्थ जानना चाहते हैं, बताइए—मैं उसी के अनुरूप सही और प्रमाणिक अर्थ दूँगा।