जैन दर्शन में ओम् को बताने वाला श्लोक
जैन दर्शन में ओम् का एक प्रमुख भाव ये है कि यह केवल एक उच्चारण नहीं, बल्कि पांच परमेष्ठियों का प्रतीक है। ओम् के तीन (या पाँच) अक्षर A-A-A-U-M मिलकर Pañca-Parameṣṭhin ( Arihant, Siddha, Acharya, Upadhyaya, Muni/Sādhū) का सार प्रस्तुत करते हैं। इस विचार को कई जैन स्त्रोतों में स्पष्ट किया गया है, और श्लोक-शाखाओं में ओम् को नमः से जोड़ा गया है।
संक्षिप्त मूल श्लोक (उदाहरण के रूप में जो ओम् का प्रयोग दिखाता है)
- ॐ अरिहंताय नमः
- ॐ सिद्धाय नमः
- ॐ आचार्याय नमः
- ॐ उपाध्यायाय नमः
- ॐ सर्व साधुभ्यो नमः
Arth (ार्थ) स्पष्ट करें:
- Om = Pañca-Parameṣṭhīn का संकেত है, जो जैन साधु-संस्तुता की प्रधान क्रमशः पूजा-आरोहण को दर्शाता है।
- पहले अक्षर A = Arihant (आरिहंत), दूसरे A = Aśhiri/ Siddha (सिद्ध), तीसरा A = Acharya (आचार्य), U = Upadhyaya (उपाध्याय), M = Muni/Sādhu (साधु)।
- यह श्लोक-विधि जैन संप्रदायों (Digambar/Shvetambar) में भी मान्य है और ओम् के साथ इन पाँच परमेष्ठियों की आराधना को अभिव्यक्त करता है।
जहाँ आप इसे पढ़ना चाहें, वहाँ का एक मान्य पाठ नीचे देखें (जैननिष्ठ स्रोत से):
- Laghu Shanti Stavan Stuti में ओम् और नमस्कार की संगति दिखती है, जिसमें ओम् का प्रयोग धार्मिक-उच्चारण के उद्देश्य से किया गया है. आप इसे यहां पढ़ सकते हैं
ध्यान दें:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में ओम् के महत्व और उससे जुड़ी व्याक्यास (व्याख्या) में थोड़ा भिन्न स्वरूप मिलते हैं, पर यह मूल विचार कि ओम् Pañca-Parameṣṭhin का प्रतीक है, दोनों में स्थिर माना गया है।
- अगर आप चाहें, मैं इसी विषय पर Digambar और Shwetambar की अलग-अलग परंपरागत व्याख्याओं के विशेष अंश भी सरल शब्दों में संक्षेप कर दूँ।