Kevali pantasya kis jain path main aata hain
Kevali (केवलि) मतलब उन जीवों को कहते हैं जिनके पास पूर्ण ज्ञान, दर्शन, और चित्त की शुद्ध अवस्था होती है—यानि वे सभी कर्मों से मुक्त हो चुके होते हैं। इसे जैन पथ का परम लक्ष्य माना जाता है।
किस मार्ग से मिलता है यह?
- मूल मार्ग तीन दिगंतों में से एक है: सम्यक दर्शन (right faith/सत्य-विश्वास), सम्यक ज्ञान (right knowledge/सत्य ज्ञान), और सम्यक आचरण (right conduct/सत्य आचरण)—ये तीनों मिलकर ज्ञान को पक्का करते हैं और कर्मों के बंधन को काटते हैं।
- केवलि तब मिलते हैं जब जीव ने सभी अवरोधक कर्मों को पूरी तरह समाप्त कर लिया हो и मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक तप के साथ—आध्यात्मिक अभ्यास, तप, व्रत और सही आचरण के साथ।
- जैन धर्म में केवलि प्राप्त करने वाले प्रमुख उदाहरण बनते हैं तीर्थंकरों और उन महत्त्वपूर्ण आत्माओं के होते हैं, जो अपने पूर्वकृत कर्मों को काटकर सम्यक ज्ञान को पूर्णतः प्राप्त कर लेते हैं।
नोट:
- diggingambar और śvetambar परंपराओं में कुछ शब्दार्थ या व्याख्याएं भिन्न हो सकती हैं, पर मुख्य विचार वही है: केवलि वह अवस्था है जिसमें आत्मा ने सभी कर्मों को समाप्त कर लिया हो और पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया हो।
- अगर आप किसी खास ग्रंथ या स्तोत्र में बताए गए “केवलि” के अर्थ की स्पष्ट व्याख्या चाहते हैं, बताइए—मैं उसी के अनुसार सही और सम्मानजनक विवरण दे दूँगा।