Bhagwaan parshwnath ke pehle shravak
संक्षेप में:
- अगर आपका सवाल “Parshwanath से पहले कौन‑सा Shravak” से है, तो Jain धर्म में Shravak सिर्फ एक lay भक्त होते हैं—किसी विशेष Tirthankar से पहले या बाद में नामित नहीं होते। हर Tirthankar के आत्म-प्रचार और उपदेश को Shravak मानते हैं। यानी Parshwanath से पहले या उसके बाद एक अलग “कौन सा Shravak” नहीं होता; Shravak सभी Tirthankars की शिक्षाओं के अनुयायी हो सकते हैं।
- अगर आपका मतलब “Parshwanath से पहले आने वाले Tirthankar” से है, तो Parshwanath से पहले 22वें Tirthankar थे Neminath (नेमिनाथ).
फॉर्मल बिंदु
- Shravak का अर्थ: शुद्ध धार्मिक भक्त जो अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे पञ्च महाव्रत अपनाते हैं और Tirthankar के शास्त्रों को मानते हैं.
- Digambar बनाम Shwetambar में अर्थ-संरचना में सामान्य अमोघ मतभेद नहीं होते; दोनों ही परंपराओं में Shravak की भूमिका एक समान है, यदि आपको चाहें तो दोनों परंपराओं के अंतर को सरल तरीके से समझाते हैं.
अगर आप चाहें, मैं Parshwanath और Neminath के बारे में सठीक, शुद्ध स्रोत सेarth (arth) और उनके जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाओं का संक्षिप्त पंक्तिबद्ध विवरण दे सकता/सकती हूँ.