101 अतिचार किसके होते है
स्याराम पूछत हो कि “101 अतिचार किसके होते है” – Jain धर्म के अनुसार ऐसा नहीं है।
- महत्त्वपूर्ण तथ्य: सूत्रों में अतिचार (अतिचार/अतिक्रम) के आठ-आठ प्रकार बताए गए हैं:
- संक्षिप्त सार उठाकर समझें तो: अतिचार वे छोटे-छोटे दोष हैं जो व्रत-उपवास के पूर्ण पालन में कभी-कभी हो जाते हैं; इन्हें जानकर सुधारना और क्षमा-प्रायश्चित्त करना आवश्यक माना गया है। दो भागों में आठ-आठ प्रकार बताए गए हैं, जैसे कि चोरी-प्रयोग, चोरी-आदान, मिलावट, आदि कई प्रकार का व्यवहृत दोष। ( jainknowledge.com, jainkosh.org)
यदि आप चाहें, मैं इन आठ-दर्शनों और आठ-चारित्राचार के प्रत्येक अतिचार का संक्षेप अर्थ (arth) और उन पर विचार कैसे करें, सरल भाषा में दे सकता/सकती हूँ।