अतिचार कितने है
अतिचार (अतिचार/अतिक्रम) एक नियम-भंग की छोटी पथभ्रष्टियाँ मानी जाती हैं जो vows (व्रत) के पूर्ण पालन के बजाय हल्की-सी चूकें होती हैं। कई ग्रंथों में इनकी संख्या अलग-अलग बताई गई है, पर आम तौर पर एक बड़े निष्कर्ष के रूप में 24 प्रमुख अतिचारों का एक व्यापक क्रम मिलता है। नीचे उसी समन्वित सूची का सार दिया गया है:
- 24 प्रमुख अतिचारों के नाम (नोट: कुछ ग्रंथ इन नामों में छोटे-छोटे फेर-बदल कर देते हैं; इससे परंपरा-विशेष Digambar बनाम Shwetambar में भिन्नता भी हो सकती है)
- इनके भीतर भी विविध उप-वर्ग और वर्णन हैं, जैसे देशातिचार (देश-केन्द्रित चूक) बनाम सर्वत्यागातिचार (व्रत के सभी अंगों में दोष) आदि। अलग-खाल के ग्रंथों में इन नामों के कुछ भिन्न-भिन्न उप-प्रकार भी देखे जा सकते हैं।
- महत्व और उद्देश्य: अतिचार मुख्य व्रत-पालन की शुद्धता में छोटे-छोटे दोष बनाते हैं; इनका पारायण-स्वरूप प्रायश्चित्त-सम्पादन से दूर किया जाता है ताकि साधना पूरी पवित्रता के साथ आगे बढ़ सके।
नोट:
- Digambar तथा Shwetambar परंपराओं में नाम-वार्ता और वर्गीकरण कुछ जगहों पर अलग-अलग मिलते हैं। जैसे कुछ पाठों में 24 के स्थान पर अलग-अलग सूचियाँ भी मिल सकती हैं। मुख्य बात यही है कि हर अतिचार के कारण मन-वचन-काय के भीतर दोष आ जाते हैं और प्रायश्चित्त से उनका क्षय किया जाता है।
अगर आप चाहें, मैं इन 24 अतिचारों के प्रत्येक का अर्थ (arth) साधना-शास्त्रों के संदर्भों के साथ सरल शब्दों में बता सकता हूँ, या आप किसी विशेष ग्रंथ में उद्धृत सूची देखने के लिए एक संदर्भ-संकेत दे सकता हूँ।
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