Vah koun thi jo apne pati ko jain dharam mai laayi aur dono saath saath moksh gye
वह कथा Mayṇāsundarī (Maināsundarī) की है. वह Śvetāmbara Jain परंपरा में राजा Śrīpāl की पत्नी मंदिर-धर्म की आदर्श महिला मानी जाती हैं।
- वह कौन थीं? Mayṇāsundarī, राजा Śrīpāl की पत्नी, जिनकी कहानी Jain समाज में विवाह-धर्म और पत्नी-धर्म की मिसाल के तौर पर कही जाती है।
- उसने अपने पति को जैन धर्म में कैसे लाया? उसने धर्म को समझने और अपनाने के लिए मुनि-संवाद सुना, नवकार-मनtras (Navkār-mantra) का जाप और आयambil के नौ-नौ दिनों के उपवास आदि धार्मिक अभ्यास साथ में किए। इस क्रम में पति भी जैन साधना की ओर प्रेरित हुए।
- क्या दोनों साथ-साथ मोक्ष गए? हाँ, परंपरा के अनुसार वे एक साथ अनेक जन्मों के बाद मोक्ष को पहुँचे, अंततः मोक्ष पाने की अवस्था तक पहुँचे।
- Digambar बनाम Śvetāmbara दोनों परंपराओं में भिन्नता: यह विशेष कथा Śvetāmbara परंपरा में प्रमुख रूप से प्रसिद्ध है और Mayṇāsundarī उसी परंपरा की महिलाभावना के रूप में कही जाती है। Digambar परंपरा में similarly प्रेरक महिलाएँ होती हैं, लेकिन नाम-चरित्र और विवरण शीर्षक के तौर पर अलग हो सकते हैं।
अगर आप चाहें, मैं इस कथा का सरल सार (arth) या परंपरागत रूप से दी जाने वाली सीख भी और साफ-साफ दे सकता हूँ।