सुशिक्षित उत्तर:
- श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों ही जैन धर्म के प्रमुख संप्रदाय हैं, पर वे टेक्निकल-तिथिकाल और पाठ-प्रयोग में भिन्न पद्धतियाँ रखते हैं. इसलिए पार्युषण/दश-लक्षण पर्व दोनों में भाव एक जैसा है, पर विधियाँ अलग-अलग हैं. यह अलगाव centuries-old liturgicalCLUSIVE evolution के कारण हुआ है, न कि भगवान Mahavira के सिद्धांत से विरोधी कुछ। दोनों के août में आत्म-शुद्धि, क्षमा माँगना और अहिंसा ही उद्देश्य है। (
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- दिगम्बर बनाम श्वेतम्बर के मुख्य भिन्नताएँ (संक्षेप)
- कालावधि: श्वेतम्बर 8 दिन का पार्युषण मानते हैं (samvatsari तक पहुंचकर सम्वत्सरी के दिन क्षमावाणी), जबकि दिगम्बर 10 दिन का दश-लक्षा पर्व मनाते हैं। (
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- केंद्र पाठ/आयोजन: श्वेतम्बर समूह Kalpa Sutra के पाठ और महावीर-जीवन-वृत्त पर अधिक जोर देता है; दिगम्बर समूह दश-लक्षण (10 virtues) के साथ दैनिक अभ्यास पर केंद्रित रहता है। क्षमावाणी/क्षमावनी को भी दोनों में अलग-लग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। (
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- कैलेंडर-विश्वास: दोनों अपने luni-solar कैलेंडर के अनुसार तिथियाँ तय करते हैं, पर शुरू होने की तिथि और समापन की तिथि में अन्तर आ सकता है (इस कारण कभी-भी तिथियाँ एक जैसी नहीं होतीं). (
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- सरल समझ में एक वहन-जो कहा जाए
- श्वेतम्बर: 8 दिन, Kalpa Sutra के पाठ और Samvatsari (क्षमावाणी) पर जोर।
- दिगम्बर: 10 दिन, हर दिन एक विशेष virtue पर ध्यान—Kshama, Mardav, Arjava, Shauch, Satya, Sanyam, Tap, Tyag, Akinchanya, Brahmacharya; अंत में Kshama-vara (क्षमा) से समापन।
- दोनों का उद्देश्य एक ही: अहिंसा, संयम, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण से आत्म-शुद्धि और सभी जीवों से क्षमा मांगना। (
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- दोनों रास्ते हैं उसी लक्ष को पाने के लिए—अपने कर्म स्मरण करें, पर्व-उपवास करें, स्व-आलोचना करें, और दूसरों से क्षमायाचना से karmic-बन्धन कम करें; फर्क सिर्फ पाठ और दिन-गिनती का है। (
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अगर आप चाहें तो मैं इन फर्कों के बारे में एक संक्षिप्त पंक्ति-दर-पंक्ति सार भी दे सकता हूँ या श्वेतम्बर-सनातनKalpa Sutra पाठ बनाम दिगम्बर दश-लक्षण के खास दिन-नाम भी दे सकता हूँ.