Vo raja th koun jinhe pinjre main tota dekhar sansaar ki mithya ko samjha
उस राजा का नाम Hemaprabha था (Hemapura के राजा). Jain कथाकोष (Kathakoca) में यह कथा बताई गई है कि Hemaprabha और उसकी पत्नी Jayasundari दोनों पहले जन्म में मोर-परियों के रूप में थे। उनकी कथा से यह समझ मिलती है कि संसार माया है और कर्म के अनुसार जन्म-हत्या, प्रेम-घृणा आदि चक्र चलते रहते हैं। इसी पूर्व जन्म में पारिवारिक दायित्व, दया और सही आचरण का कारण लेकर वे मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ते हैं। यह कहानी यह भी दिखाती है कि भोग-प्राप्तियाँ क्षणभंगुर हैं और सही कर्मों के अनुसार ही जीवन में स्थायी शांति मिलती है।